दुर्गा पूजा विवाद पर सोनू त्यागी: ‘हिंदू और सनातन अध्यात्म का मूल संदेश अहिंसा और करुणा है’

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    गो स्पिरिचुअल के संस्थापक सोनू त्यागी ने कहा, हिंदू और सनातन अध्यात्म के मूल आदर्श अहिंसा, करुणा और सात्विक जीवन हैं; शाकाहार को दबाव से नहीं, जागरूकता और प्रेम से अपनाने की जरूरत

    मुंबई/नई दिल्ली: दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर चल रही बहस के बीच गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट के संस्थापक सोनू त्यागी ने कहा है कि इस मुद्दे को राजनीति, व्यक्तियों और क्षेत्रीय विवाद से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है। उनके अनुसार, इस बहस को हिंदू अध्यात्म, सनातन मूल्यों, अहिंसा, पशु करुणा और भोजन के प्रति हमारी सोच से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

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    इस विवाद के बाद खासकर पश्चिम बंगाल में भोजन, आस्था और क्षेत्रीय परंपराओं को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने दुर्गा पूजा के पवित्र दिनों में मछली और मांस से दूर रहने की अपील की है, जबकि कुछ लोग बंगाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और खान-पान की परंपराओं की बात कर रहे हैं। सोनू त्यागी का कहना है कि भारत की अलग-अलग परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन साथ ही हमें अध्यात्म के असली उद्देश्य पर भी विचार करना चाहिए।

    सोनू त्यागी ने कहा, “हिंदू अध्यात्म हमें करुणा सिखाता है। जब हम देवी मां की पूजा करते हैं, तो सभी जीवों के प्रति दया क्यों नहीं दिखा सकते? दुर्गा पूजा और नवरात्रि शक्ति, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व हैं। हमारी पूजा केवल मंदिर या पंडाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर हमारी भक्ति सच्ची है, तो उसे हमें इंसानों, पशुओं और प्रकृति के प्रति अधिक दयालु और संवेदनशील बनाना चाहिए।”

    त्यागी ने साफ किया कि गो स्पिरिचुअल किसी धार्मिक गुरु, राजनेता, संगठन या राजनीतिक दल के साथ व्यक्तिगत या राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहता। संस्था इस मुद्दे को एक बड़े आध्यात्मिक सवाल के रूप में देखती है कि क्या हमारी आस्था और धार्मिक जीवन हमें ऐसा इंसान बना रहे हैं, जो दूसरे जीवों का दर्द समझ सके और जहां संभव हो, उनके दुख और पीड़ा को कम करे।

    उनका कहना है कि हिंदू धर्म और सनातन धर्म बहुत विशाल हैं। इनमें अलग-अलग परंपराएं, रीति-रिवाज और विचार हैं। अलग-अलग समय और क्षेत्रों में लोगों की खान-पान की आदतें भी अलग रही हैं। लेकिन इस विविधता को स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि हम अहिंसा, दया, करुणा, सात्विकता, संयम और सभी जीवों के प्रति सम्मान जैसे हिंदू और सनातन अध्यात्म के मूल आदर्शों की बात ही न करें।

    सोनू त्यागी ने कहा, “इतिहास हमें बता सकता है कि अलग-अलग समय में लोग क्या खाते थे या उनकी क्या परंपराएं थीं, लेकिन धर्म हमें यह भी सोचने की प्रेरणा देता है कि हमें कैसा इंसान बनना चाहिए। अध्यात्म का मतलब अपने भीतर बदलाव लाना है। यह हमें अधिक जागरूक, शांत, संयमी और दयालु बनने की ओर ले जाता है। गो स्पिरिचुअल के लिए शाकाहार इसी आध्यात्मिक यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा है।”

    उन्होंने कहा कि हिंदू और सनातन परंपराओं में सात्विक भोजन, शाकाहारी प्रसाद और शाकाहारी जीवनशैली का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। देश के अनेक हिंदू मंदिरों, वैष्णव परंपराओं और आध्यात्मिक संस्थाओं में शाकाहारी भोजन को महत्व दिया जाता है। गो स्पिरिचुअल का मानना है कि इतिहास में मांसाहार या पशु बलि के कुछ उदाहरणों को आधार बनाकर हिंदू और सनातन संस्कृति में मौजूद अहिंसा, करुणा और शाकाहार की विशाल परंपरा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    हालांकि, त्यागी ने यह भी कहा कि शाकाहार को कभी अहंकार या खुद को दूसरों से बेहतर समझने का कारण नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सिर्फ शाकाहारी होने से कोई अपने आप अच्छा इंसान नहीं बन जाता और मांसाहारी भोजन करने से किसी इंसान के पूरे व्यक्तित्व का फैसला नहीं किया जा सकता। लेकिन हमें एक साधारण सवाल जरूर पूछना चाहिए—जब हमारे पास किसी पशु की जान लिए बिना अपना भोजन पाने का विकल्प है, तो हम अधिक दयालु विकल्प क्यों न चुनें?”

    त्यागी के अनुसार, अहिंसा केवल इंसानों के बीच हिंसा न करने तक सीमित नहीं है। पशुओं को भी दर्द होता है, उन्हें भी डर लगता है और वे भी जीना चाहते हैं। इसलिए अध्यात्म को हमें पशुओं की पीड़ा के प्रति भी संवेदनशील बनाना चाहिए।

    उन्होंने कहा, “किसी पशु का जीवन हमारे कुछ पलों के स्वाद से कहीं ज्यादा कीमती है। हम जीवन में हर तरह की हिंसा को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जिस हिंसा और पीड़ा को हम आसानी से रोक सकते हैं, उसे भी नजरअंदाज कर दें।”

    साथ ही, सोनू त्यागी ने शाकाहार को किसी पर जबरदस्ती थोपने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा, “हम शाकाहार की बात करते हैं, उसे थोपते नहीं हैं। हम लोगों से अपील करते हैं, उन्हें धमकाते नहीं हैं। अगर हम अहिंसा की बात करते हुए किसी दूसरे इंसान का अपमान करते हैं, तो हम अहिंसा की भावना को ही खत्म कर देते हैं। करुणा को जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता। करुणा जागरूकता से आती है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के भोजन के आधार पर यह तय नहीं किया जाना चाहिए कि वह हिंदू या सनातनी है या नहीं। “खाने की कोई बहस इस बात का सर्टिफिकेट नहीं बननी चाहिए कि कौन हिंदू या सनातनी है और कौन नहीं। हिंदू और सनातन परंपरा इतनी विशाल और गहरी है कि उसे किसी की थाली तक सीमित नहीं किया जा सकता। हम अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करते हुए भी शाकाहार और करुणा की बात कर सकते हैं।”

    दुर्गा पूजा का जिक्र करते हुए त्यागी ने कहा, “जब हम मां दुर्गा को देवी मां मानकर उनकी पूजा करते हैं और उनसे शक्ति, सुरक्षा और करुणा मांगते हैं, तो क्या वही मातृत्व और करुणा दूसरे जीवों तक नहीं पहुंच सकती? सच्चा अध्यात्म हमारी करुणा का दायरा बढ़ाता है। भारत को भोजन पर एक और गुस्से वाली बहस की जरूरत नहीं है। भारत को करुणा और समझदारी से भरी बातचीत की जरूरत है।”

    सोनू त्यागी अवार्ड-विनिंग लेखक, निर्देशक और निर्माता हैं। वे गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप के संस्थापक हैं। मीडिया, कम्युनिकेशंस, एडवरटाइजिंग, फिल्म और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में उन्हें दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वे अध्यात्म, मानवता, शाकाहार, अहिंसा, पशु करुणा और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की लगातार वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि अध्यात्म केवल पूजा-पाठ और धार्मिक रस्मों में नहीं, बल्कि इस बात में दिखाई देना चाहिए कि हम इंसानों, पशुओं और प्रकृति के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।

    गो स्पिरिचुअल एक स्पिरिचुअल और वेलनेस संगठन है, जो अध्यात्म, सामाजिक और परोपकारी कार्यों, आध्यात्मिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस, आयुर्वेद और समग्र जीवन, स्पिरिचुअल टूरिज्म, मीडिया और इवेंट्स के क्षेत्र में काम करता है। अपने गो वेज अभियान के माध्यम से संस्था शाकाहार, अहिंसा और पशु करुणा को बढ़ावा दे रही है। संस्था का मानना है कि शाकाहार को किसी पर थोपने के बजाय जागरूकता और करुणा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन एंड ऐप अध्यात्म, वेलनेस, मानवता, सकारात्मक जीवन और सामाजिक विषयों पर केंद्रित है।

    अप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप, जिसकी स्थापना सोनू त्यागी ने की है, एंटरटेनमेंट, कम्युनिकेशंस और मीडिया के क्षेत्र में काम करता है। अप्रोच एंटरटेनमेंट सेलिब्रिटी एवं टैलेंट मैनेजमेंट, फिल्म प्रोडक्शंस, एडवरटाइजिंग एवं कॉरपोरेट फिल्म प्रोडक्शंस, फिल्म मार्केटिंग, इवेंट्स और एंटरटेनमेंट मार्केटिंग में काम करता है। अप्रोच कम्युनिकेशंस एक अवार्ड-विनिंग पीआर, डिजिटल और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एजेंसी है। ग्रुप का अप्रोच बॉलीवुड बॉलीवुड एवं एंटरटेनमेंट न्यूज़वायर, पोर्टल और ऐप है।

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