वाग्धारा की राष्ट्रीय संगोष्ठी “युद्ध नहीं बुद्ध “ का आयोजन 27 अप्रैल को

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    मुंबई । पूरी दुनिया पर छाये विश्वयुद्ध के संकट के विरोध में शांति का संदेश देने के मकसद से वाग्धारा संस्था ने आगामी 27 अप्रैल को सांताक्रुज पूर्व के मौलाना आजाद भवन में “युद्ध नहीं बुद्ध “एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है । प्रख्यात लेखक व फ़िल्म निर्देशक रूमी जाफरी इस परिचर्चा के मुख्य अतिथि होंगे।

    वाग्धारा के अध्यक्ष डॉ.वागीश सारस्वत ने बताया कि युवा पत्रकार मनीषा जोशी के संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता वीरेंद्र याग्निक करेंगे जबकि रक्षा विशेषज्ञ व मुंबई विद्यापीठ के हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ.करुणा शंकर उपाध्याय और भारतीय नौसेना के सेवा निवृत्त कमांडर भूषण दीवान मुख्य वक्ता होंगे।अभिनेता रवि यादव के संचालन में डॉ.वागीश सारस्वत विषय की प्रस्तावना रखेंगे जबकि वरिष्ठ पत्रकार युद्ध विषयक नवगीत प्रस्तुत करेंगे।कवयित्री नंदिता माजी शर्मा तथा मीनू मदान भी युद्ध विषय पर अपनी कविताएँ प्रस्तुत करेंगी।वाग्धारा के महासचिव एडवोकेट भार्गव तिवारी संगोष्ठी के निमन्त्रक तथा पूर्व पार्षद शिवजी सिंह संगोष्ठी के स्वागत अध्यक्ष होंगे।

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    लेखक पत्रकार अमर त्रिपाठी गीतकार गोपाल दास नीरज की प्रसिद्ध कविता “अगर तीसरा युद्ध हुआ “का पाठ करेंगे।
    डॉ.वागीश सारस्वत ने बताया कि वाग्धारा का सफ़र 10 अक्टूबर 1985 को प्रारंभ हुआ था।साहित्य और संस्कृति के उत्थान के मकसद से वाग्धारा की स्थापना की गई। बहुत कम समय में वाग्धारा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली।जनवरी 1990 में वाग्धारा ने उद्गार पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया था।उद्गार पत्रिका के पहले अंक से ही लघुपत्रिका के क्षेत्र में स्थापित हो गई। वर्ष 2004 में वाग्धारा ने मुंबई में होली का आयोजन प्रारंभ किया जिसमें फ़िल्म उद्योग के कलाकार बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे वर्ष 2016 तक लगातार पवई में वाग्धारा का होली समारोह आयोजित किया जाता रहा।समाचार चैनलों पर लाइव दिखाए जाने के कारण वाग्धारा की होली देश भर में मशहूर हो गई। 2007 के दशहरा से साप्ताहिक समाचार पत्र वाग्धारा का प्रकाशन भी शुरू किया गया। 2017 से राष्ट्रीय स्तर पर वाग्धारा सम्मान समारोह का सिलसिला भी चल रहा है।

    समाज सेवा,शिक्षा,सिनेमा,चिकित्सा,रंगमंच,नृत्य और संगीत आदि नौ क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को राज्यपाल के करकमलों से सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही विविध विषयों पर सेमिनार व महोत्सव भी आयोजित किए जाते रहे हैं। गोवा व्यंग्य महोत्सव,मुंबई व्यंग्य महोत्सव तथा कला महोत्सव विशेष रूप से चर्चित आयोजन रहे हैं।
    फिलहाल दुनिया पर विश्वयुद्ध का संकट गहराया हुआ है। वाग्धारा ने शांति का संदेश देने के मकसद से “युद्ध नहीं बुद्ध “ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है।

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