Tehreek-e-Hurriyat: The Unlawful Element in Jammu-Kashmir Politics

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एक संगठन जो बरसो से Jammu-Kashmir की राजनीति को प्रभावित करता आया है , क्या आप जानते हैं कि इस संगठन का उद्देश्य क्या है? क्या आप जानते हैं कि इसकी स्थापना किसने की थी? और क्या आपने सुना है कि केंद्र सरकार ने इसे हाल ही में ‘अवैध संगठन’ घोषित किया है? -Jammu-Kashmir -The Unlawful Element

इन सभी सवालों के मिलेंगे जवाब चलिए करते है शुरुआत।  नमस्कार आप देख रहे है AIRR न्यूज़।

तहरीक-ए-हुर्रियत (TeH) एक Jammu-Kashmir में स्थित राजनीतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य भारत से Jammu-Kashmir को अलग करना और पाकिस्तान के साथ मिलाना है। इस संगठन की स्थापना 7 अगस्त 2004 को सैयद अली शाह गिलानी ने की थी, जो जमात-ए-इस्लामी कश्मीर से अलग हो गए थे। गिलानी की मृत्यु के बाद, मसरत आलम भट ने इसकी अध्यक्षता संभाली, जो वर्तमान में कारावास में हैं।

आपको बता दे कि, TeH को केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2023 को अवैध गतिविधियों (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत ‘अवैध संगठन’ घोषित किया है। इसका मतलब है कि इस संगठन के सदस्यों और समर्थकों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, और इसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं। इस फैसले के पीछे की वजह यह है कि TeH को जम्मू-कश्मीर में देशविरोधी और विभाजनकारी गतिविधियों, आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने, और Jammu-Kashmir में इस्लामिक शासन स्थापित करने के लिए लोगों को उकसाने का आरोप लगाया गया है।

TeH का इतिहास Jammu-Kashmir के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य के साथ गहरी तरह से जुड़ा हुआ है। २००४ में TeH की स्थापना सैयद अली शाह गिलानी ने की, जो जमात-ए-इस्लामी कश्मीर से अलग हो गए थे। गिलानी को हुर्रियत कांफ्रेंस के हार्डलाइन फैक्शन का नेता माना जाता था, जो भारत से जम्मू-कश्मीर को अलग करने के पक्ष में था। इसके बाद 2010 TeH के नेता मसरत आलम भट ने जम्मू-कश्मीर में आजादी के प्रदर्शनों का आयोजन किया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। इन प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा भी हुई, जिसमें 120 से अधिक लोगों की मौत हुई। भट को गिरफ्तार कर लिया गया, और उन पर कई मामले दर्ज किए गए।

गौरतलब है कि 2015 में ही भाजपा समर्थित मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सरकार ने भट को रिहा करने का फैसला किया। 2016 में भारत सरकार ने Jammu-Kashmir में बुरहान वानी की मौत के बाद उभरे हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए गिलानी, भट और अन्य आजादी के नेताओं को गिरफ्तार किया।

लोकसभा चुनावो के बीच 2019 में भारत सरकार ने Jammu-Kashmir की विशेष राज्य स्थिति को खत्म कर दिया, और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया। इसके बाद, जम्मू-कश्मीर में एक लंबा आपातकाल लगाया गया, जिसमें इंटरनेट, फोन और मीडिया की सेवाएं बंद कर दी गईं, और कई राजनीतिक नेताओं को नजरबंद कर दिया गया।

2020 में गिलानी की मृत्यु के बाद, भट को TeH का नया अध्यक्ष बनाया गया। भट ने गिलानी के रास्ते को आगे बढ़ाने का वादा किया,और भारत के खिलाफ जम्मूकश्मीर में आजादी की लड़ाई को जारी रखने का ऐलान किया।

2021 वो साल था जब भट को तिहाड़ जेल में भेज दिया गया, जहां वह अभी भी बंद हैं। उन पर आतंकवाद, देशद्रोह, दंगा फैलाने और अन्य आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। और अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने TeH को UAPA के तहतअवैध संगठनघोषित किया, जिससे इसके सदस्यों और समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई की जाने कि उम्मीद कि जा रही है। साथ ही कुछ आलोचक इसे लोकसभा चुनावो के साथ साथ J & K में होने वाले चुनावो को प्रभावित करने कि ये भाजपा कि चाल है जो विपक्षी नेताओ,सामाजिक कार्यकर्ताओ और उनके आलोचकों का इसी तरीके से दमन करती रही है। फ़िलहाल उनके दावों कि सच्चाई कि पुष्टि हम नहीं कर सकते है।

बाकि अंत में हम इतना ही कह सकते है कि TeH को अवैध संगठन घोषित करने का फैसला जम्मू-कश्मीर में विभिन्न वर्गों के बीच विवादों को उभार कर लाया है। कुछ लोग इसे भारत की एकता और अखंडता की रक्षा का एक जरूरी कदम मानते हैं, जो आतंकवाद और विभाजनवाद को रोकने के लिए आवश्यक है। वे यह भी कहते हैं कि TeH और इसके नेताओं ने Jammu-Kashmir में शांति और विकास को बाधित किया है, और उन्हें कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।

दूसरी ओर, कुछ लोग इसे Jammu-Kashmir के लोगों के अधिकारों और आवाजों को दबाने का एक और प्रयास मानते हैं, जो उनकी आजादी और आत्म-निर्णय की मांग को अस्वीकार करता है। वे यह भी कहते हैं कि TeH एक राजनीतिक संगठन है, जिसे अपने विचार और विचारों को व्यक्त करने का अधिकार है, और उसे आतंकवादी या अवैध घोषित करना गलत है।

TeH को अवैध संगठन घोषित करने का फैसला एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें Jammu-Kashmir के भविष्य, भारत-पाकिस्तान के रिश्ते, और लोकतंत्र और आतंकवाद के बीच की जद्दोजहद के बारे में विभिन्न दृष्टिकोण और विचार सामने आते हैं। इस विषय को समझने और सुलझाने के लिए, हमें इतिहास, राजनीति, सामाजिकता, और कानून की जानकारी की जरूरत है, जो इस वीडियो में हमने आपको समझाने कि कोशिश कि है।

आशा है कि यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी।  ऐसी ही अन्य जानकारियों से अपडेट रहने के लिए AIRR न्यूज़ को सब्सक्राइब और फॉलो जरूर करे।

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