भारत के महान्यायवादी – Attorny General of India कौन होता है ?

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    नमस्कार मित्रों,

    आज के इस लेख में हम जानेंगे कि ”  भारत के महान्यायवादी – Attorny General of India कौन होता है ? सरकार को कई बार ऐसी-ऐसी कानूनी समस्या का सामना करना पड़ जाता है , जिसमे आवश्यकता होती है, ऐसी किसी व्यक्ति की जिसे कानूनी अनुभव हो और समय समय पर सरकार को उचित कानूनी सलाह दे सके। ऐसी किसी व्यक्ति की नियुक्ति का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 76 में किया जिन्हे भारत का महान्यायवादी कहा जाता है। 

    भारत के महान्यायवादी को लेकर कई सावल उठ रहे होंगे जैसे कि :-

    1. भारत का महान्यायवादी कौन होता है ?
    2. भारत के  महान्यायवादी की नियुक्ति कौन और कैसे करता है ?
    3. भारत के महान्यायवादी के कार्यकाल की अवधि और वेतन क्या है ? 
    4. भारत के महान्यायवादी के अधिकार क्या है ?

    इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से जानते है। 

    भारत के महान्यायवादी - Attorny General of India कौन होता है ?

    1. भारत का महान्यायवादी कौन होता है ?

    भारत का महान्यायवादी उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनने की योग्यता रखने वाला एक ऐसा अनुभवी उच्च विधि अधिकारी, जो कि संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा भारतीय सरकार को कानूनी सलाह  देने के लिए  और भारतीय सरकार का न्यायालयों में प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया जाता है। संविधान और अन्य कानूनी के तहत प्रदान किये गए विधिक कर्तव्यों का निष्ठा के साथ पालन करना होता है। 

    भारत का महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है , जो कि समय समय पर उचित विधिक सलाह प्रदान करता है और भरतीय उच्चतम न्यायालय में सरकार का प्रमुख वकील होता है, जो कि न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। 

    2. भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कौन और कैसे करता है ? 

    भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है जो कि देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। राष्ट्रपति किसी ऐसे व्यक्ति को भारत के महान्यायवादी के रूप में नियुक्त करते है , जो कि उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के पद नियुक्त होने की योग्यता रखता है।  

    3. भारत के महान्यायवादी के कार्य क्या है ?

    भारत के महान्यावादी के कार्यो का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 (2) में दिए गए है :-

    1. भारत सरकार को ऐसे विधिक विषयों पर सलाह देना और विधिक स्वरूप के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो कि राष्ट्रपति द्वारा समय समय पर उसे निर्दिष्ट या सौपें जाएँ।  
    2. भारतीय संविधान या उस समय लागु किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदान किये गए कृत्यों का निर्वहन करना। 
    3. अपने कर्तव्यों के निर्वहन में महान्यावादी को भारत के राज्य्क्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होता है। 

    4. भारत के महान्यायवादी के कार्यकाल की अवधि  और वेतन कितना होता है ?

    1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76(4) के तहत भारत के महान्यायवादी के कार्यकाल की अवधि राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त तक पद धारण करता है। इसका अर्थ यह हुआ की जब तक राष्ट्रपति की इच्छा है तब तक व्यक्ति भारत का महान्यायवादी के पद पर बना रहेगा। 
    2. भारत के महान्यायवादी का वेतन के सम्बन्ध में ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राष्ट्रपति अवधारित करें।  

    5. भारत के महान्यावादी के अधिकार क्या है ?

    भारतीय संविधान अनुच्छेद 88 में सदनों के बारें में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार का उल्लेख किया गया है, जिसके तहत महान्यायवादी के अधिकार निम्न है :-

    1. किसी भी सदन में लोक सभा और राज्य सभा,
    2. सदनों की संयुक्त बैठक में ,
    3. संसद की किसी समिति में 

    महान्यायवादी का नाम सदस्य के रूप में दिया गया है , तो बोलने और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार होता है , लेकिन अनुच्छेद 88 के आधार पर किसी भी सदन में मताधिकार नहीं होता है।  







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