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18 वर्ष से कम बच्चे के द्वारा वाहन चलाने से होने वाली मोटर दुर्घटना में सजा किसको होगी ?


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नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि 18 वर्ष से कम बच्चे के द्वारा वाहन चलाने से होने वाली मोटर दुर्घटना में सजा किसको होगी ?  अक्सर सार्वजनिक स्थान पर देखने को मिल जाता है, नाबालिग यानी 18 वर्ष से कम उम्र में बच्चे मोटर यान ( बाइक, कार , स्कूटी अन्य मोटर यान ) चलाते हुए दिख जाते है, और ऐसा वे अपने माता पिता या मोटर यान स्वामी की अनुमति से या अनुमति के बिना करते है। 

मोटर यान कानून व् नियम के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर मोटर यान चलाने के लिए व्यक्ति ने 18 वर्ष की उम्र पूर्ण कर ली है और मोटर यान कानून के तहत एक वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर चूका है, जिसकी अनुमति से वह वाहन चलाने के लिए  विधिक रूप से पूर्ण है। 

18 वर्ष से काम उम्र बच्चों के द्वारा वाहन चलाने से सड़क गुर्घटना होने की संभावनाएं अधिक होती है , इसका कारण कि वे वहाँ को नियंत्रित करने में असमर्थ और इतने पूर्ण नहीं होते कि वाहन किस दिशा में कैसे चलाना है, ट्रैफिक नियमों का ज्ञान नहीं होता , और देखा देखी वाहन को सिमित रफ़्तार से अधिक रफ़्तार में चलाते है। 

अब ऐसे में किशोर द्वारा वाहन चलाने से होने वाले अपराध में दण्डित किये जाने का प्रावधान भी है। 

1.18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे द्वारा मोटर यान चलाने से होने वाली दुर्घटना में जिम्मेदारी और सजा किसको मिलेगी ? 

जो कोई भी व्यक्ति 18 वर्ष से कम उम्र का है , उसके संरक्षक या मोटर यान स्वामी की सहमति से मोटर यान सार्वजनिक स्थान पर चलाता है,और उसके द्वारा कोई भी गुर्घटना होती है तो, उस किशोर के संरक्षक या मोटर यान स्वामी की जिम्मेदार होगी और उन्हें दण्डित किया जायेगा।  

1.संरक्षक या मोटर यान स्वामी को सजा। 

केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1988 कि धारा 199 क किशोर द्वारा किये गए अपराध में दण्डित किया जाने का प्रावधान करती है , जिसके तहत जहाँ कोई अपराध मोटर यान अधिनियम 1988 के अधीन किसी किशोर द्वारा किया गया है ऐसे किशोर के संरक्षक या मोटर यान स्वामी अधिनियम के उल्लंघन का दोषी माना जायेगा और दण्डित किया जायेगा। संरक्षक या मोटर यान सस्वामी को 3 वर्ष तक कारावास की सजा और 25,000 रूपये जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। 

2.किशोर को सजा। 

केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 199 क की उपधारा 5 के तहत जहा कोई अपराध किशोर के द्वारा किया गया है वहां धारा 4 के अधीन मोटर यान चलाने के लिए उम्र 18वर्ष निर्धारित है कि 18 वर्ष से कम आयु का किशोर सार्वजनिक स्थान पर मोटर यान नहीं चलाएगा या धारा 7 के अधीन कुछ यानों के लिए लर्निंग लाइसेंस दिए जाने पर रोक है, इनके अधीन होते हुए भी ऐसा किशोर को धारा 8 के अधीन लर्निंग लाइसेंस या धारा 9 के अधीन चालन लाइसेंस प्रदान किये जाने पर रोक होगी , जब तक की वह किशोर 25 वर्ष की उम्र पूर्ण नहीं कर लेता।  

किशोर न्याय अधिनियम 2000 की धारा 56 के तहत किशोर को बाल गृह या विशेषगृह में रहने के लिए नैसर्गिक स्थान को भेजा जायेगा।  

3.मोटर यान पर प्रतिबन्ध। 

केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 199 क की उपधारा 4 के तहत कोई अपराध किशोर के द्वारा किया गया है वहां अपराध किये जाने में शामिल मोटर यान को 12 माह की अवधि के लिए रद्द किया जायेगा। 

 

2.कब किशोर के संरक्षक और मोटर यान स्वामी दण्डित नहीं किये जायेंगे ?

केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1988 की 199 क की उपधारा 3 के तहत किशोर के संरक्षक या मोटर यान स्वामी को किशोर के द्वारा किये गए अपराध के सम्बन्ध में दण्डित नहीं किया जायेगा जहाँ किशोर को अधिनियम की धारा 8  के अधीन लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस या चालन लाइसेंस प्रदान की गयी है और वह किशोर ऐसा मोटर यान चला रहा था जिसे किशोर चलाने के लिए प्राधिकृत किया गया था।   







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