रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों के लिए गया में पिंडदान, यूलिया दिला रही हैं मोक्ष

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    सनातन संस्कृति में पिंडदान को मोक्ष का रास्ता बताया गया है…पितरों का पिंडदान करने के लिए भारत में बिहार राज्य का गया जिला वो स्थान है जो सबसे उत्तम माना गया है…पूरी दुनिया के सनातनी अपने जीवन में एक बार यहां आकर अपने पितरों का पिंड दान करते हैं…यहीं पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता ने अपने कुल के लोगों को मोक्ष दिलाने के लिए पिंड दान किया था…रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए सैनिकों से कैसे जुड़ी है पिंड़दान की कहानी और कैसे गया में हुआ उनका पिंड दान आर हम इसपर विस्तार से चर्चा करेंगे…-Russia-Ukraine war

    रूस-यूक्रेन में चल रहे युद्ध को आने वाली 24 फरवरी को 2 साल पूरे हो जाएंगे…जहां एक ओर इस युद्ध का अभी तक कोई परिणाम नहीं नज़र आ रहा है वहीं दोनों देशों की ओर से मारे जा रहे सैनिकों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है… युद्ध में मारे गए इन्ही सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए गया में पिंडदान किया गया…-Russia-Ukraine war

    रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में 24 फरवरी 2022 से अब तक मारे गये सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष की प्राप्ति के लिए यूक्रेन की एक महिला ने गया के एक मंदिर में पिंडदान किया…हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष के दौरान गया में पिंडदान करते हैं उनके पूर्वजों को जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा मिल जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है…पितृ पक्ष के 16 दिनों की अवधि में हिंदू अपने पूर्वजों का श्राद्ध एवं तर्पण तथा पिंडदान करते हैं इसके लिए वो गया भी जाते हैं…पिंडदान के लिए गया सबसे उत्तम स्थान है लेकिन अगर कोई ना जा सके तो किसी भी नहीं या जलाशय के किनारे पितरों के निमित्त पिंडदान कर सकता है…

    युद्ध में मारे गए सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने गया आई इस यूक्रेनी महिला का नाम यूलिया है…यूलिया ने कहा यह दूसरा मौका है जब मैं पिंडदान करने आई हूं…मैं पिछले साल भी अपने माता-पिता की आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिये यहां आई थी….उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध निश्चित तौर पर समाप्त होना चाहिए इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मैं ये सब करके शांति का संदेश भी देना चाहती हूं जिससे दोनों देशों के बीच जारी ये महायुद्ध खत्म हो सके…-Russia-Ukraine war

    युलिया ने इस्कॉन प्रचारक लोकनाथ गौड़ की मदद से पिंडदान किया…इस मौके पर गौड़ ने कहा कि यूलिया सनातन धर्म में दृढ़ विश्वास रखती हैं…उन्होंने गया और पितृ पक्ष के दौरान यहां पिंडदान करने के महत्व के बारे में बहुत अध्ययन किया है…यहां के विष्णुपद मंदिर में प्रतिवर्ष पितृ पक्ष मेले का आयोजन किया जाता है…हर वर्ष, दुनिया भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए मंदिर में आते हैं…ऐसे में यूलिया भी सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया….

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